जब शाम घर हमारे आए प्रोफेस्सर रामदास
हम बोले "जन्म हुआ बालक का फ़िर क्यों हो इतने उदास"
बड़े अनमानते हुए बोले "मुझे कोई चीज़ नही भाती
क्या होगा भविष्य नवजात शिशु का यही चिंता मुझे सताती"
हमने कहा क्या मुश्किल यह पता लगाने में
बंद कर दो उसे एक कक्ष अनजाने में
हो जहाँ रखा एक सेब , रुपया और एक गीता
फ़िर देखना तुम वेह बाल किसका स्पर्श करता
गर उठा कर सेब चबयेगा
तो धरा की सेवा कर किसान बन जाएगा
गर उठा रुपया खेलेगा और खेलेगा खेल
बन उद्योगपति रखेगा , लक्ष्मी को डाल नकेल
उठा लेता अगर हाथ में भगवत पुराण
बड़ा हो बनेगा पंडित ज्ञानी और विदुआं
प्रोफेस्सर ने शंका की साँस भरी
और अपने आगे की बात कही
अगर वेह उठाता एक हाथ में सेब दूजे में रुपया
और बैठ जता गीता पर
वेह ना बनेगा उद्योगपति ना ही स्कॉलर
हमने कहा फ़िर आपके बच्चे का भविष्य बहुत उज्जवल है
उसके एक पैर के नीचे आज है दूजे के नीचे कल है
यह वेह शख्सियत है बुध्धि सबकी हर लेता है
वेह और कोई नही भावी राजनेता है
-समीर