चलते चलते पंक दल में गिरा अफसर सरकारी,
देख लोग हैरान थे की आयी विपदा भारी
देखकर सबने उसकी दारुण अवस्था ,
अपना हाथ बढाकर हाथ 'देने' को कहा
परन्तु अफसर ने नही बढाया अपना हाथ,
लोग चकित थे देख अनहोनी बात
खींच रहा था दलदल उस हाड मांस के दोने को,
जैसे खींच रहा हो कोई नरभक्षी पौधा किसी कीट सलोने को
हैरान तथा बेबस थी मानव श्रंखला ,
समझ कोई नही पा रहा था की करें तो क्या करें भला
अफसर को बचाने के लिए उस नीर से ,
एक समझदार युवक बढ़ा उस भीड़ से
अफसर की विवशता को समझ गया वो,
अपने करो को सामने रखकर बोला हाथ 'लो'
युवक के हाथ में उसने अपना हाथ दिया,
इस प्रकार उसने अपने को डूबने से बचा लिया
हैरान थे लोग अफसर के इस व्यवहार से,
लोगों की हालत समझ युवक बोला बड़े गुमार से
यह शख्स सरकारी अफसर है,
इसके लिए लेना जीवन और देना म्रत्यु के बराबर है
इसलिए जो मना कर रहा था हाथ अपना हाथ देने से,
वेह चूका नही मेरा हाथ लेने से
यही है जो भ्रष्टाचार को सेते हैं ,
यह दुआएं देते नही बस आम आदमी की बाद दुआ लेते हैं
-समीर
Tuesday, May 27, 2008
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